दुख मेरे हरो भजन लिरिक्स
चंदन चावल बेल की पतिया,शिव जी के माथे धरो, हे भोलानाथ दिगंबर,ये दुख मेरे हरो, हरो रे…. अगर चंदन का बश्म चढ़ाउ, शिव जी के पैयाँ पडु,नंदी उपर स्वार भयो रामा, मस्तक गंगा धरो,ये दुख मेरे हरो…… शिव शंकर जी को तीन नेत्र हैं, अद्भुत रूप धरो,अर्धंगी गौरी पुत्र गजानन, चंद्रमा माथे धरो,ये दुख मेरे … Read more